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अखंड भारत ::--हमारा संकल्प

Posted by Economic on September, 10, 2020

14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि में भारत का विभाजन हुआ था ।और भारत के दो टुकड़े कर दिए गए थे। जिससे भारत माता विभाजित हुई और जिन्हें भारत और पाकिस्तान नाम से जाना गया। लेकिन यह विभाजन पूर्ण सत्य नहीं है ।क्योंकि हमें अखंड भारत की संकल्पना को साकार करके दिख लाना है ।और हमें अखंड भारत को बनाने के लिए सतत रूप से परिश्रम करते रहना होगा।
जिस तरह स्वाधीनता से पूर्व प्रत्येक राष्ट्रभक्त के लिए स्वाधीनता की भावना मुख्य प्रेरणा का स्रोत हुआ करती थी ।उसी तरह स्वाधीनता के बाद अखंड भारत का सपना प्रत्येक राष्ट्र के लिए एक प्रेरणा स्रोत होना ही चाहिए। परंतु वर्तमान समय में आज आम जनता अखंड भारत का विचार ही मन में नहीं लाती है। यह बहुत दुखद घटना है। इसका कारण यह भी हो सकता है कि आम जनता ने विभाजन को पूर्ण सत्य मान लिया है ।लोग कहते हैं कि विभाजन तो हो गया अब क्या किया जा सकता है? भारत को अखंड कैसे बनाया जा सकता है.? इसके लिए सबसे पहले हमें लोगों के मन से इस *पूर्ण सत्य* को झूठा साबित करने के लिए प्रयत्न करना होगा। और इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में लोगों को समझाना होगा ।उन्हें बताना होगा कि पूर्व में भी विभाजित और असंभव लगने वाले 2 देशों का मिलन भी संभव हुआ है।
यहूदियों को अट्ठारह सौ वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद इजराइल देश मिल चुका है इसी तरह वियतनाम का भी एक एकीकरण हमारे सामने हैं
1857 का स्वतंत्रता संग्राम विफल होने के बाद स्वतंत्रता असंभव लगने लगी थी लेकिन 1947 में ही 90 वर्षों के बाद स्वतंत्रता हमें प्राप्त हुई। स्वाधीनता से पहले भारत विभाजन हो सकता है ऐसा किसी भी राष्ट्र भक्तों ने मन में सोचा भी नहीं होगा।लेकिन स्वाधीनता के साथ-साथ विभाजन भी 1947 में ही हुआ यह सत्य है ।
1970 से पूर्व बांग्लादेश राष्ट्र का निर्माण होगा ऐसा सोचने वाले लोग थे ही नहीं लेकिन 24 वर्षों के बाद ही बांग्लादेश अस्तित्व में आया ।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी का विभाजन हुआ था लेकिन बर्लिन की दीवार गिरने में अधिक समय नहीं लगा और जर्मनी कुछ वर्षों के बाद ही अखंडित रूप में हमारे समक्ष है ।
शीत युद्ध के समय सोवियत संघ विश्व की प्रमुख धुरी हुआ करती थी लेकिन वर्तमान में सोवियत संघ के अनेक टुकड़े हो चुके हैं और सोवियत संघ भूतपूर्व का दर्जा प्राप्त कर चुका है ।
ऐसे अनेकों उदाहरणों से हम समझ सकते हैं कि जो हमें असंभव लग रहा था वह भी संभव हुआ। यदि गौर से हम इतिहास पर नजर डालेंगे तो पता चलेगा कि इतिहास ऐसी असंभव लगने वाली बातों के संभव होने से भरा हुआ है। अतः भारत विभाजन को भी पूर्ण सत्य क्यों माना जाये ?? पुनः भारत अखंड हो सकता है। और इसके लिए हमें मजबूत इच्छाशक्ति और प्रयत्नों की आवश्यकता होगी ।और यही विचार प्रत्येक राष्ट्रभक्त के हृदय में होना चाहिए।
अखंड भारत कैसे बनेगा आज यह कहना कठिन है। लेकिन इसके लिए हम अपने स्तर से क्या प्रयास कर सकते हैं ऐसा सोचा जा सकता है .?
सबसे पहले तो हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि अखंड भारत एक सांस्कृतिक संकल्पना है, राजनीतिक संकल्पना नहीं है ।अखंड भारत के लिए समस्त भूभाग के लोगों में सांस्कृतिक एकरूपता की भावना का होना आवश्यक है ।राजनीतिक रूप से समस्त भूभाग पर एक केंद्रीय शासन हो भी सकता है,और नहीं भी हो सकता है। ऐसा अनिवार्य नहीं है। आवश्यकता है तो इस बात की कि हम सांस्कृतिक रूप से एकात्म हो।राजनीतिक रूप से नेपाल,भूटान,श्रीलंका,म्यामार हमें भारत से अलग प्रतीत होते हैं ।लेकिन सांस्कृतिक रूप से वहां के व्यक्ति भी हमें अपने लगते हैं ।वहां की संस्कृति अपनी संस्कृति लगती है। यह एक स्वाभाविक स्थिति है ।एक राष्ट्र-अनेक राज्य की संकल्पना हमारे यहां प्राचीन काल से ही चली आ रही है।हमारे यहां राजसूय यज्ञ, अश्वमेधयज्ञ आदि के माध्यम से एक चक्रवर्ती साम्राज्य की स्थापना होती रही है ।आज भी यही उदाहरण देखने को मिल रहा है। सिक्किम राज्य 1970 से पहले भूटान और नेपाल की तरह ही स्वतंत्र था ।लेकिन बाद में भारत में विलय हुआ। विलय के समय कोई विशेष घटना घटित नहीं हुई क्योंकि ऐसा किसी को लगा ही नहीं सिक्किम कभी हमसे अलग था।हमने ऐसा कभी समझा ही नहीं सिक्किम के लोग अपने नहीं हैं ।पहले भी सिक्किम अखंड भारत का अंग था और आज भी वह अखंड भारत का महत्वपूर्ण अंग है। एक राष्ट्र--एक राज्य के रूप में वर्तमान मैं सिक्किम भारत का हिस्सा है पहले वह एक राज्य--अनेक राज्य की संकल्पना के रूप में हमारे साथ में था.।
हम कैसे कहेंगे कि सांस्कृतिक रूप से एक राष्ट्र हो गए हैं?? इसके लिए हमें कुछ मान बिन्दुओं को समझना होगा जिसमें सामान जीवन मूल्य, समान श्रद्धा केंद्र जैसे (गौ माता, गंगा माता) व समस्त पवित्र स्थान और उनके प्रति मन में श्रद्धा भाव तथा आने-जाने के लिए बिना किसी बाधा के आवाजाही हो ऐसा हम मान सकते हैं। और सभी लोग मेरे अपने हैं ऐसा भाव मन में लाना यह मान बिंदु सांस्कृतिक एकरूपता के प्रतीक हो सकते हैं। और वर्तमान में भूटान और नेपाल के साथ इन सभी मान बिंदुओं पर सहमति है ।और यह दोनों राज्य उपर्युक्त कसौटी ऊपर खरे उतरते हैं ।श्रीलंका और म्यांमार आज भले ही उतने खरे नहीं उतरते हो,जितने भूटान और नेपाल उतरते हैं परंतु यह स्थिति बांग्लादेश और पाकिस्तान की तरह विकट नहीं है। शीघ्र ही यह दोनों राज्य भूटान और नेपाल की तरह सांस्कृतिक रूप से भारत में सम्मिलित होंगे।बांग्लादेश और पाकिस्तान सांस्कृतिक रूप से यह दोनों देश अखंड भारत की संकल्पना में ही आते हैं। जब भारत के मुसलमानों के साथ--साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमानों में भी सांस्कृतिक एकरूपता की भावना के आधार पर अखंड भारत के बारे में इच्छा जागृत होगी, तभी अखंड भारत का सपना पूरा हो सकता है ।
इस तरह भारत को अखंड भारत बनाने के लिए हमें संगठित प्रयास करने होंगे ।इस प्रक्रिया में समय अधिक लग सकता है। इसके लिए हमें मन बना कर रखना होगा। हमें सबसे पहले अखंड भारत के विषय को आमजन के बीच में ले जाना होगा ।और उन्हें अखंड भारत की संकल्पना के बारे में समझाना होगा इसके लिए हम कुछ उपक्रम, कुछ कार्यक्रम कर सकते हैं--जैसे 14 अगस्त को अखंड भारत संकल्प दिवस का आयोजन करके युवाओं के सामने इस विषय को ठीक प्रकार से प्रस्तुत किया जा सकता है.। ऐसे कार्यक्रम जब हम किसी विशेष अवसर पर करेंगे तो उसका विशेष असर भी होता है और परिणाम भी शीघ्र मिलता है। इसके लिए हम 14,15 अगस्त के दिन अखंड भारत संकल्प दिवस का आयोजन कर सकते हैं। 9 अगस्त से लेकर 15 अगस्त तक यह सप्ताह अखंड भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए समर्पित किया जा सकता है। और 26 जनवरी को भारत माता का पूजन जैसे कार्यक्रम अखंड भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए किए जा सकते हैं ।साथ ही इस तरह के कार्यक्रमों के प्रचार प्रसार के लिए समाचार पत्र ,पत्रिकाओं, पुस्तिकाओं आदि माध्यमों का सहयोग लिया जा सकता है ।
वर्तमान युग में सोशल मीडिया का चलन बढ़ गया है तो इसके लिए हम सोशल मीडिया का भी प्रयोग कर सकते हैं ।हम सभी अपने-अपने घरों में अखंड भारत का मानचित्र भी दीवारों पर लगा सकते हैं ।जिससे अखंड भारत का संकल्प हमारी आंखों के सदैव समक्ष रहे ।।और हमें अपना संकल्प याद रहे ।दूरदर्शन,समाचार पत्र, पत्रिकाओं में प्रकाशित खंडित भारत मां का मानचित्र हमारी आंखों को चुभेगा। और यहां हमें अखंड भारत के संकल्प का स्मरण बार-बार दिलाता रहेगा ।भारत फिर से अखंड होगा यह तो तय है ।इस विषय में महर्षि अरविंद जी ने जी भविष्यवाणी की है कि निश्चित ही भारत अखंड होगा क्योंकि अखंड होना भारत की नियति है। परंतु अखंड भारत कब होगा यह हमारे पुरुषार्थ, परिश्रम और संघटित प्रयासों पर अधिक निर्भर करता है ।इसके लिए हमें अधिक से अधिक लोगों को कई पीढ़ियों तक अपने संगठित प्रयासों को जारी रखना पड़ेगा।।याची देही याची डोला (इसी देह से इन्हीं आंखों से) के संकल्प के साथ हमें अखंड भारत के संकल्प को पूरा करना है।।" मैं भी उन सौभाग्यशाली लोगों में रहूंगा जो अखंड भारत बनाने के लिए कटिबद्ध है""ऐसा संकल्प हम सभी को करना चाहिए जिससे अखंड भारत शीघ्र ही हमारे समक्ष हो ।।
जय हिंद



This entry was posted on September, 10, 2020 at 17 : 56 pm and is filed under Social. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response from your own site.

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